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आज भारत रत्न ए पी जे अब्दुल कलाम की पुन्यतिथि है। एक महान वैज्ञानिक और मिसाईल मैन के रुप में उन्होने देश को परमाणु शक्ति बनाया। एक शिक्षक के तौर पर उन्होने युवाओ का मार्गदर्शन किया देश को 2020 का विज़न दिया। कृतज्ञ राष्ट्र उन्हे नमन करता है।
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एक नेक शख्सियत, एक महान वैज्ञानिक और एक श्रेष्ठ पथपदर्शक भारत रत्न अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम के धनुषकोडी गाँव के एक मध्यमवर्ग परिवार में हुआ।
रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनका प्ररंभिक शिक्षा शुरु हुआ। जीवन आभावों के बीच गुजरा। पढ़ाई जारी रखने के लिए अख़बार बेचना पड़ा। 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, यहां से उनकी विज्ञान की यात्रा शुरु हुई। हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश मिला। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े। डॉक्टर अब्दुल कलाम को भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल है। भारत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बनने का गौरव हासिल हुआ। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने की कामयाबी हासिल हुई। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र को डिजाइन किया। देश को अग्नि और पृथ्वी जैसे प्रक्षेपास्त्रों से लैस किया। कलाम के सफल नेतृत्व में ही भारत दुनिया की परमाणु शक्तियों की कतार में आखड़ा हुआ। देशवासियों ने उन्हें नाम दिया मिसाइल मैन। एक दार्शनिक के रुप में भारत को 2020 तक विकास के पथ रास्ता दिखाया। वे देश के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इसके बाद वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। राष्ट्र सेवा के लिए उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इससे पहले 1990 पद्म विभूषण और 1981 पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 40 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हुई। 27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में व्याख्यान दे रहे थे इस बीच उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वे बेहोश हो कर गिर पड़े। लगभग 6:30 बजे गंभीर हालत में इन्हें बेथानी अस्पताल ले जाया गया और दो घंटे के बाद उनके देहांत की पुष्टि कर दी गई। कलाम चिरनिद्रा में लीन हो गये। जीवन के संघर्षों के बीच कामयाबी सबक और अभावों में उम्मीदों की किरण थे कलाम एक कर्म योगी और सच्चे देश भक्त को कृत्ज्ञय राष्ट्र नमन करता है। | |
Wednesday, July 27, 2016
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