अनेक रंग है इस पर्व के, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते है,
बैर और दुश्मनी के दंभ सारे धुलते हैं,
बहता है रंग जो चहुं ओर
मित्रता के संगत बनते हैं
बैर और दुश्मनी के दंभ सारे धुलते हैं,
बहता है रंग जो चहुं ओर
मित्रता के संगत बनते हैं
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते है,
प्रीत की रीत के परिणय बनते हैं,
होती है मादकता हर ओर
प्रेम के मधुर पग बढ़ते हैं
प्रीत की रीत के परिणय बनते हैं,
होती है मादकता हर ओर
प्रेम के मधुर पग बढ़ते हैं
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते हैं,जीवन पे पसरी नीरसता मिटती है,
होती है प्रसन्नता सभी ओर
नयी उमंग में सब संग बढ़ते है
अनेक रंग है इस पर्व के, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
होली
होली आई , खुशियाँ लाई
खेले राधा सँग कन्हाई
खेले राधा सँग कन्हाई
फैन्के इक दूजे पे गुलाल
हरे , गुलाबी ,पीले गाल
प्यार का यह त्योहार निराला
खुश है कान्हा सँग ब्रजबाला
चढा प्रेम का ऐसा रँग
मस्ती मे झूम अन्ग-अन्ग
मस्ती मे झूम अन्ग-अन्ग
हम खेले शब्दो के सँग
भावो के फैन्केगे रन्ग
भावो के फैन्केगे रन्ग
रन्ग-बिरन्गे भाव दिखेन्गे
आज हम होली पे लिखेन्गे
आज हम होली पे लिखेन्गे
जलाएँ उसमे बुरे विचार
कटु-भावो का करे तिरस्कार
कटु-भावो का करे तिरस्कार
नफरत की दे दे आहुति
आज लगाएँ प्रेम भभूति
आज लगाएँ प्रेम भभूति
सब इक दूजे के हो जाएँ
आओ हम सब होली मनाएँ
आओ हम सब होली मनाएँ






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